मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना (MNSSBY) बिहार सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसे ‘सात निश्चय’ कार्यक्रम के तहत 2 अक्टूबर 2016 को शुरू किया गया था । इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य 20 से 25 वर्ष की आयु के बेरोजगार युवाओं को रोजगार तलाशने के दौरान ₹1000 प्रतिमाह की वित्तीय सहायता प्रदान करना है । यह सहायता अधिकतम दो वर्षों की अवधि के लिए दी जाती है, जिससे युवाओं को आर्थिक चुनौतियों का सामना करने में मदद मिल सके ।
हाल ही में, योजना के दायरे में एक महत्वपूर्ण विस्तार किया गया है। पूर्व में, यह भत्ता केवल उन युवाओं के लिए उपलब्ध था जिन्होंने इंटरमीडिएट (12वीं) उत्तीर्ण किया था और उच्च शिक्षा प्राप्त नहीं कर रहे थे । अब, सरकार ने ग्रेजुएट उत्तीर्ण बेरोजगार युवाओं को भी इस योजना में शामिल करने का निर्णय लिया है । यह संशोधन राज्य सरकार की बदलती परिस्थितियों के प्रति प्रतिक्रिया को दर्शाता है और बेरोजगारी की समस्या को भी दिखाता है कि सरकार रोजगार देने के बजाय बेरोजगारी भत्ता दे रही है…

हालांकि, यह योजना केवल एक निष्क्रिय बेरोजगारी भत्ता नहीं है। वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए, लाभार्थियों को श्रम संसाधन विभाग द्वारा संचालित ‘कुशल युवा कार्यक्रम’ (KYP) के तहत भाषा, संवाद और बुनियादी कंप्यूटर कौशल का अनिवार्य प्रशिक्षण प्राप्त करना होता है । यह शर्त योजना को एक निष्क्रिय सहायता से एक सक्रिय कौशल विकास और रोजगार क्षमता बढ़ाने वाले कार्यक्रम में बदल देती है।
इस रिपोर्ट में, योजना के प्रमुख प्रावधानों, इसके अनिवार्य घटकों और बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के साथ अक्सर होने वाले भ्रम का विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा, ताकि इसके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों का गहन मूल्यांकन प्रस्तुत किया जा सके।
इसे अपनाने के कारण:
बिहार सरकार ने राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए एक दूरदर्शी योजना ‘सात निश्चय’ (सात संकल्प) की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य शासन और विकास के प्रमुख क्षेत्रों में सुधार लाना था। इस कार्यक्रम के पहले स्तंभ को “आर्थिक हल, युवाओं को बल” नाम दिया गया था, जो राज्य के युवाओं को सशक्त बनाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने पर केंद्रित था ।
इसी व्यापक लक्ष्य के तहत, मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना का शुभारंभ 2 अक्टूबर 2016 को किया गया था ।
योजना की शुरुआत का उद्देश्य उन शिक्षित युवाओं को लक्षित करना था जो 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद भी आगे की पढ़ाई जारी नहीं रख पाए थे और रोजगार की तलाश में थे ।

इन युवाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करके, सरकार का लक्ष्य उन्हें नौकरी खोजने की प्रक्रिया के दौरान आर्थिक रूप से सशक्त बनाए रखना था ।
यह पहल बिहार सरकार की एक प्रतिबद्धता को दर्शाती है कि वह राज्य के शिक्षित युवाओं की क्षमता का दोहन करने और उन्हें राष्ट्र निर्माण में सक्रिय रूप से योगदान करने के लिए आवश्यक संसाधन प्रदान करना चाहती है । लेकिन इसमें स्नातक पास छात्रों को जोड़ना कहाँ तक उचित है?…





