बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की राजनीतिक सरगर्मियां अब अपने चरम पर पहुँच गई हैं। एक तरफ जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के बीच तीखी बयानबाजी जारी है, वहीं दूसरी तरफ महागठबंधन में टिकट वितरण और सीट शेयरिंग को लेकर भारी खींचतान देखने को मिल रही है।
आरजेडी की लिस्ट पर हंगामा और बीजेपी का हमला
राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने 143 सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है, जिसमें 24 महिलाओं को टिकट दिया गया है। तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का चेहरा बताते हुए पार्टी ‘तेजस्वी सरकार’ का नारा दे रही है। हालांकि, लिस्ट जारी होते ही यह विवादों में घिर गई। बीजेपी ने कई उम्मीदवारों को लेकर सीधा हमला बोला है:
- विवादास्पद उम्मीदवार: दरभंगा से राकेश नायक (जो पहले मुसलमानों को ‘पाकिस्तानी’ कह चुके हैं) और चंद्रशेखर यादव (जिन्होंने रामचरितमानस को ‘नफरत फैलाने वाला’ बताया था) को टिकट दिए जाने पर बीजेपी ने आरजेडी पर जातिवादी और देशद्रोही ताकतों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। इन उम्मीदवारों के विवादास्पद वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।
- परिहार सीट पर ड्रामा: पूर्व विधायक रितु जायसवाल ने परिहार सीट से टिकट वापस लेने की अपील करते हुए एक भावुक वीडियो जारी किया, जिसमें वह अपने परिवार के साथ रोती हुई नज़र आईं। इस घटना ने महागठबंधन के भीतर दरार की चर्चा को और हवा दे दी है।
सीट शेयरिंग: डैमेज कंट्रोल और लेफ्ट का बढ़ता कद
महागठबंधन में सीट शेयरिंग के बाद भी तनाव कम नहीं हो रहा है। डैमेज कंट्रोल के तहत, कांग्रेस ने लालगंज सीट से अपनी उम्मीदवारी वापस ली है, जिसके जवाब में आरजेडी ने भी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की सीट पर उम्मीदवार न उतारकर रियायत दी है। अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, कुछ और विवादित सीटों पर नाम वापसी की उम्मीद है।
वहीं, सीपीआई(एमएल) समेत वामपंथी दलों को 30 से अधिक सीटें मिली हैं, जो गरीबी और रोजगार जैसे जमीनी मुद्दों पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। हालांकि, गठबंधन के भीतर कांग्रेस और आरजेडी के बीच यादव-मुस्लिम वोट बैंक के बंटवारे को लेकर भी शिकायतें सामने आ रही हैं।

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने इस स्थिति पर तंज कसते हुए कहा है कि “जो तेजस्वी अपने गठबंधन को एकजुट नहीं रख सकते, वे बिहार को कैसे चलाएंगे?” कुल मिलाकर, बिहार चुनाव में उम्मीदवारों की लिस्ट और गठबंधन की आंतरिक खींचतान ने राजनीतिक सरगर्मियों को चरम पर पहुंचा दिया है।





