भोजपुरी सिनेमा के प्रसिद्ध गायक एवं अभिनेता और “पॉवर स्टार ” के नाम से जाने जानेवाले पवन सिंह और उनकी पत्नी ज्योति सिंह आजकल फिर चर्चा में बने हुए हैं…
1 अक्टूबर 2025 को उन्होंने फिर से बीजेपी का दामन थाम लिया। हालांकि 2024 में उन्होंने करनाटक लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की घोषणा की थी, जिसके बाद बीजेपी ने उन्हें “एंटी-पार्टी गतिविधियों” के आरोप में निष्कासित किया था।
विवाद की शुरुआत: क्या हुआ?
वर्तमान में पवन सिंह और उनकी पत्नी ज्योति सिंह के बीच विवाद सार्वजनिक हो गया है।
ज्योति सिंह ने पवन सिंह पर लगाए आरोप :-
लखनऊ स्थित पवन सिंह के घर पहुँचने पर उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया — गार्डों एवं पुलिस ने दावा किया कि उन्हें आने की अनुमति नहीं थी।
उन्होंने यह आरोप लगाया कि पुलिस को पवन सिंह द्वारा बुलाया गया था, ताकि वे उनसे मिलने न पाएं।
ज्योति ने कहा कि सारा घटनाक्रम CCTV फुटेज में दर्ज है, और उन्होंने मीडिया के सामने खुलकर बात करने की चाह जताई है।
उन्होंने यह भी कहा है कि अगर उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया जाए, तो वे राजनीति नहीं लड़ेंगी; लेकिन आज की स्थिति में उन्हें सम्मान, पारिवारिक संबंध और न्याय चाहिए।
इसके अलावा उन्होंने सास, देवर आदि पर भी कथित हस्तक्षेप का आरोप लगाया है कि पूरा विवाद “ससुराल पक्ष” के कारण है।

ज्योति सिंह के लगाए गए आरोप पर पवन सिंह की प्रतिक्रिया:-
पवन सिंह ने आरोपों को “झूठा दावा” करार दिया है और कहा है कि कुछ लोग इस विवाद को चुनावी राजनीति की उंगलियों में खेल बना रहे हैं।
उन्होंने एक इंस्टाग्राम पोस्ट में कहा कि जब ज्योति उनके सोसाइटी पहुंचीं, तो वे सम्मानपूर्वक उन्हें मिले और बातचीत हुई।
पवन सिंह का तर्क है कि ज्योति का “जबर्दस्त दबाव” है कि उन्हें टिकट दिलवाया जाए, और विवाद इसलिए खड़ा किया गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस वहां पहले से मौजूद थी, और उन्हें पुलिस ने केवल “सुरक्षा उपाय” के प्रयोजन से बुलाया था, ना कि उनके कहने पर।
विवाद और बिहार चुनाव: क्या संबंध है?
यह विवाद केवल निजी जीवन तक सीमित नहीं रह गया — इसे बिहार चुनाव की पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है, और मीडिया में इसे “इमोशनल बम” के रूप में पेश किया जा रहा है।
राजनीतिक रूप से ऐसा देखा जा रहा है कि भाजपा ने इस विवाद को लेकर “Plan B” तैयार करने की खबरें सुनाई हैं — जिसके अनुसार पवन सिंह को विधानसभा चुनाव के बजाय राज्यसभा भेजे जाने की योजना हो सकती है, और उनकी मां या किसी अन्य व्यक्ति से चुनाव लड़ा सकते हैं।
इस तरह की रणनीति से पार्टी विवाद का सामना किए बिना, चुनावी नुकसान से बचने का प्रयास कर सकती है।
मीडिया और जनता इस सवाल पर विचार कर रही है कि क्या यह विवाद सच में निजी है, या इसे चुनावी लाभ के लिए उपयोग किया जा रहा है…
बहरहाल, यह विवाद बिहार चुनाव की पृष्ठभूमि में एक बड़ा “मीडिया मुद्दा” बन गया है, और इसकी पूर्ण सच्चाई अभी साफ नहीं हुई है।





