18वर्ष का एक नौजवान जिसने मुस्कराते हुए फांसी के तख्ते पर चढ़कर मौत को गले से लगाया था…
हाँ, हम बात कर रहे हैं, वीर सपूत ख़ुदीराम बोस की उनके शहादत दिवस के अवसर पर तिरहुत रेंज कमिश्नर, मुज़फ़्फ़रपुर डीएम सुब्रत सेन, और एसएसपी समेत लोगों ने मुज़फ़्फ़रपुर सेंट्रल जेल में श्रद्धांजलि दी…..
सुब्रत सेन ने कहा:”18 वर्ष के उम्र में ख़ुदीराम ने जो बलिदान दिया वो युवाओं के लिए प्रेरणा है हमें उनकी तरह देश की एकता और अखंडता के लिए काम करना चाहिए….” उन्होंने साथ ही कहा सिर्फ़ इतिहास नहीं जिंदा प्रेरणा है ख़ुदीराम …मुजफ्फरपुर की धरती पर आज भी उनका साहस, जुनून और गीत गूँजता है…….
कौन थे
खुदीराम बोस भारत के सबसे युवा और महान क्रांतिकारियों में से एक थे। उनका जन्म 3 दिसंबर 1889 को पश्चिम बंगाल के मिदनापुर जिले में हुआ था। छोटी उम्र में ही उन्होंने अपने माता-पिता को खो दिया था, और उनकी बड़ी बहन ने उनका पालन-पोषण किया।
स्वतंत्रता संग्राम में योगदान
खुदीराम बोस ने नौवीं कक्षा में ही अपनी पढ़ाई छोड़ दी थी और वे स्वदेशी आंदोलन में शामिल हो गए थे। 1905 में बंगाल विभाजन के बाद, वे स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय हो गए और युगांतर जैसे क्रांतिकारी संगठनों से जुड़ गए। वे अंग्रेजों के खिलाफ पर्चे बांटते थे और क्रांतिकारी गतिविधियों में हिस्सा लेते थे।
मुजफ्फरपुर षड्यंत्र और शहादतखुदीराम बोस ने अंग्रेज मजिस्ट्रेट किंग्सफोर्ड की हत्या की योजना में हिस्सा लिया था, जिसने कई क्रांतिकारियों को कठोर दंड दिया था। 11 अगस्त 1908 को उन्हें मुजफ्फरपुर जेल में फाँसी दे दी गई, जब वे मात्र 18 वर्ष के थे। उन्हें आजादी की लड़ाई में फाँसी पर चढ़ने वाले सबसे कम उम्र के क्रांतिकारियों में से एक माना जाता है।खुदीराम बोस को 11 अगस्त, 1908 को फांसी दे दी गई थी, जब वे सिर्फ 18 साल के थे।
मुजफ्फरपुर षड्यंत्र की घटना
यह षड्यंत्र बंगाल के दो युवा क्रांतिकारियों, खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी द्वारा रचा गया था. उनका मकसद मुजफ्फरपुर के मुख्य प्रेसीडेंसी मजिस्ट्रेट डी.एच. किंग्सफोर्ड की हत्या करना था. किंग्सफोर्ड कलकत्ता में मजिस्ट्रेट के रूप में काम करते थे और उन्होंने कई युवा क्रांतिकारियों को कठोर दंड दिया था, जिससे वे बंगाल के क्रांतिकारियों के बीच काफी अलोकप्रिय हो गए थे.क्रांतिकारियों ने किंग्सफोर्ड का पीछा किया, जिसका हाल ही में मुजफ्फरपुर में तबादला हुआ था. 30 अप्रैल 1908 को, खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी ने किंग्सफोर्ड की बग्घी पर बम फेंका. हालांकि, उस समय किंग्सफोर्ड बग्घी में नहीं थे और बम गलती से दो ब्रिटिश महिलाओं, श्रीमती और मिस कैनेडी को लगा, जिनकी मौके पर ही मौत हो गई.
घटना के बाद
• इस घटना के बाद, खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी दोनों ने भागने की कोशिश की.
• प्रफुल्ल चाकी को पुलिस ने घेर लिया, और पकड़े जाने से बचने के लिए उन्होंने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली.
• खुदीराम बोस को बाद में गिरफ्तार कर लिया गया और फांसी दी गई……..





