सोमवार को भी प्रेमानंद महाराज पदयात्रा करते दिखाई दिए..अपने आश्रम केलीकुंज से निकलकर रमण रेती इलाके में पदयात्रा की..इस दौरान हजारों भक्त उनके दर्शन पाने को आतुर दिखे…
महाराज पहले की तरह यात्रा करते दिखे, लेकिन पहले होने वाली पदयात्रा और सोमवार को की गई पदयात्रा में अन्तर यह नजर आया कि पदयात्रा का रास्ता बहुत कम था. अभी महाराज आश्रम के पास सिर्फ 500 मीटर की यात्रा कर रहे हैं…
संत प्रेमानंद की 2 अक्टूबर से यात्रा बंद होने के बाद रास्ते में सन्नाटा पसरना शुरू हो गया था..भक्त उनके दर्शन के लिए आंसू बहाते थे..सोमवार को प्रेमानंद से बाहर यात्रा में पाकर भक्तों के आँखों में खुशी देखने को मिली और वो राधे-राधे कहने लगे……
क्या हुआ प्रेमानंद महाराज को?
भक्ति और श्रद्धा के संसार में एक मजबूत स्तंभ, प्रेमानंद गोविन्द शरण जी महाराज आज स्वास्थ्य की चुनौतियों से जूझ रहे हैं।
- हालिया रिपोर्टों में कहा गया है कि महाराज को साप्ताहिक पांच दिन डायलिसिस की आवश्यकता हो गई है। डॉक्टरों ने इसे उनकी हालत गंभीर लेकिन नियंत्रित बताया है..पहले, यह प्रक्रिया कम दिन होती थी..
- जैसे चेहरे की सूजन, लाल आंखें आदि। लेकिन राधा केली कुंज आश्रम ने घोषणा की है कि वह स्वास्थ्य रूप से स्थिर हैं और वायरल क्लिप्स पुरानी हैं।
आश्रम ने यह भी बताया कि पदयात्रा को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है, लेकिन प्रवचन और सत्संग जारी हैं। - सकारात्मक प्रेरणा और सहायता प्रस्ताव
उन्हें दोनों किडनियों की फेल्योर की समस्या है, जिसे उन्होंने वर्षों से झेला है।
किडनी रोग के संदर्भ में, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स ने इस रोग को पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज तक जोड़ दिया है।
क्या है polycystic
पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज (Polycystic Kidney Disease – PKD) एक आनुवंशिक (Genetic) या वंशानुगत बीमारी है, जिसमें किडनी के अंदर छोटी-छोटी पानी से भरी थैलियाँ बन जाती हैं।
ये थैलियाँ समय के साथ बड़ी होती जाती हैं, जिससे गुर्दों का आकार बढ़ने लगता है और वे धीरे-धीरे सही तरह से काम करना बंद कर देते हैं।
यह बीमारी गुर्दों की सामान्य कार्यक्षमता को कम कर देती है।
यह जीन में होने वाले बदलाव के कारण होती है और परिवार में चल सकती है।
बीमारी के प्रमुख प्रकार
- ऑटोसोमल डोमिनेंट PKD (ADPKD):
माता या पिता में से किसी एक को हो तो बच्चे को 50% संभावना
लक्षण आमतौर पर 30–40 वर्ष की उम्र के बाद दिखते हैं
- ऑटोसोमल रिसेसिव PKD (ARPKD):
जन्म या बचपन में ही लक्षण दिख जाते हैं
बच्चे के दोनों माता-पिता के जीन में दोष होना जरूरी





