आज से सिर्फ 1 दिन बाद, शनिवार, 18 अक्टूबर को, दीपावली के 5 दिवसीय महापर्व की शुरुआत हो रही है ‘धनतेरस’ के साथ!
आज शुक्रवार, 17 अक्टूबर के दिन से ही घरों में उत्साह और बाज़ारों में रौनक दिखने लगी है। हर कोई इस पर्व के लिए तैयारी कर रहा है।
धनतेरस का यह पावन दिन न केवल धन की देवी माँ लक्ष्मी और धन के कोषाध्यक्ष कुबेर देवता के पूजन का है, बल्कि यह आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि के अवतरण का भी दिन है। इसीलिए, यह त्योहार सिर्फ ‘धन’ ही नहीं, बल्कि ‘स्वास्थ्य’ और ‘सौभाग्य’ का भी प्रतीक है।
धनतेरस के दिन बाजार जगमग करता रहता है..
• इस आप बर्तन, सोना, चांदी या नए सामान की खरीदारी कर सकते हैं। कहते हैं इस दिन खरीदा गया सामान 13 गुना बढ़ता है!
• बढ़ते बीमारियों के बीच इस बार, केवल संपत्ति ही नहीं, बल्कि अपने स्वास्थ्य में भी निवेश करें। भगवान धन्वंतरि से अच्छी सेहत का वरदान माँगे।
• पूजा की सामग्री, नए दीपक और घर की साफ-सफाई को आज ही अंतिम रूप दें, ताकि धनतेरस और दिवाली पर पूरा ध्यान उत्सव में लग सके।
धनतेरस क्यों मनाते हैं?
धनतेरस दीपावली उत्सव की शुरुआत का प्रतीक है। यह दिन धन, आरोग्य और खुशहाली का संदेश लेकर आता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए यह पर्व स्वास्थ्य और आयु वृद्धि से भी जुड़ा हुआ है।
धनतेरस के दिन लोग सोना, चांदी, बर्तन या नए सामान की खरीदारी करते हैं, क्योंकि इसे शुभ माना जाता है। ऐसा विश्वास है कि इस दिन की गई खरीदारी घर में लक्ष्मी और समृद्धि लाती है। शाम को दीप जलाकर भगवान धन्वंतरि और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है, जिससे जीवन में धन, स्वास्थ्य और सौभाग्य बना रहे।





