अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा H-1B वीजा फीस में बहुत अधिक बढ़ोतरी के कारण दुनिया में हड़कंप मचा हुआ है, इसी बीच चीन की शी जिनपिंग सरकार ने नयी K वीजा केटेगरी शुरू की है..इस वीजा के माध्यम से ग्लोबल टैलेंट को चीन में आकर्षित करना है इसकी लॉन्चिंग 1 अक्टूबर से की जाएगी..चीनी विदेश मंत्रालय प्रवक्ता ने कहा वैश्वीकरण के दौर में देशों के बीच आपसी सहयोग जरूरी है..चीन दुनिया के टैलेंट को साथ लेकर चलना चाहता है..
K- वीजा के फायदे:
[ ] K वीजा के लिए कंपनी से जॉब ऑफर की अनिवार्यता नहीं रखी गयी है इस वीजा से चीन में जाकर जॉब सर्च कर सकते हैं..
[ ] ये वीजा मल्टीप्ल एंट्री और 10 साल की विस्तारित अवधि तक चीन में रहने की सुविधा देगा..
[ ] STEM यानि साइंस ,मैथ्स ,टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग में पास आउट को इस विषय में वरीयता दी जाएगी..
[ ] यंग टैलेंट 45 साल तक के उम्र के लोगों को वरीयता दी जाएगी….
विदित हो कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीज़ा धारकों पर लगने वाले शुल्क को 88,000 से बढ़ाकर $100,000 (लगभग ₹88 लाख) करने का फ़ैसला लिया है। यह वीज़ा उन विदेशी पेशेवरों के लिए है जो अमेरिका में काम करना चाहते हैं।
ट्रंप के इस कदम से सबसे ज़्यादा भारतीय पेशेवर प्रभावित हुए हैं, क्योंकि H-1B वीज़ा का सबसे ज़्यादा उपयोग भारतीय ही करते हैं। H-1 वीजा के 3 00,000 उपयोगकर्ता भारतीय हैं इस फैसले को ट्रंप प्रशासन द्वारा अमेरिकी नागरिकों की नौकरियों की सुरक्षा के लिए उठाया गया कदम माना जा रहा है।
चीन का K-टैलेंट वीजा वार क्या है?
[ ] चीन ने अमेरिका के H-1B वीज़ा पर शुल्क बढ़ाने के फ़ैसले के जवाब में एक नया वीज़ा, जिसे K वीज़ा नाम दिया गया है, पेश किया है। यह कदम चीन का टैलेंट वॉर है, जिसका उद्देश्य दुनिया भर के प्रतिभाशाली और उच्च-कुशल पेशेवरों को अपने देश में आकर्षित करना है।
यह वीज़ा विशेष रूप से STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) क्षेत्रों के पेशेवरों को लक्षित करता है। इस वीज़ा के तहत, विदेशी पेशेवरों को बिना किसी कंपनी के आमंत्रण के भी चीन में आने और काम करने की अनुमति मिल सकती है, जिससे वीज़ा प्रक्रिया बहुत सरल हो जाती है। यह चीन को तकनीकी और आर्थिक महाशक्ति बनाने की एक रणनीतिक पहल है





