पटना: आगामी बिहार विधानसभा चुनावों से पहले, कांग्रेस ने आज एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर भाजपा और जदयू के पिछले 20 साल के शासन को ‘विनाश काल’ करार दिया। इस दौरान पार्टी ने एक विस्तृत आरोप पत्र जारी किया, जिसमें मौजूदा सरकार पर भ्रष्टाचार, कुशासन, अपराध और पलायन को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया। प्रेस कॉन्फ्रेंस का मुख्य नारा था: “जिन्होंने मां गंगा को दिया धोखा, अब बिहार उन्हें नहीं देगा मौका।”
भ्रष्टाचार और वित्तीय कुप्रबंधन पर हमला
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सरकार पर सबसे गंभीर आरोप वित्तीय कुप्रबंधन को लेकर लगाए। उन्होंने कहा, “20 साल के इस शासन ने बिहार के बारे में पूरे देश में जो छवि बनाई है, वह विनाश की है।” उन्होंने सीएजी (CAG) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि ₹70,877 करोड़ से अधिक के फंड का हिसाब नहीं मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी फंड को मनरेगा (MNREGA) और पोषण आहार जैसी योजनाओं से निकालकर निजी संपत्ति बनाने के लिए ट्रांसफर किया गया।

कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बिहार को दिए गए विशेष पैकेज (₹1.25 लाख करोड़) के खर्च और उसके नतीजों पर भी सवाल उठाए। गहलोत ने केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों पर आरोप लगाया कि मोदी जी की नीतिगत विफलता के कारण ही डिप्टी सीएम और मंत्रियों पर गंभीर आरोप लगने के बावजूद कोई इस्तीफा नहीं हो रहा है।
अपराध, पलायन और सामाजिक सूचकांक की दुर्दशा
कांग्रेस ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए दावा किया कि बिहार क्राइम में देश में दूसरे स्थान पर है, जहां प्रतिदिन औसतन 8 हत्याएं और 3 अपहरण हो रहे हैं। यह स्थिति तब है जब उद्योगपतियों की भी हत्या हो रही है, तो गरीब और आम जनता का क्या हाल होगा, यह समझा जा सकता है।
पलायन के मुद्दे पर नेताओं ने कहा कि रोजगार के अवसर न मिलने के कारण 3 करोड़ लोग बिहार से पलायन कर गए हैं, जो सरकार की विफलता का सबसे बड़ा प्रमाण है।

शिक्षा और सरकारी भर्तियों में घोटाला
जयराम रमेश और अशोक गहलोत ने बिहार की शिक्षा व्यवस्था पर कड़े प्रहार किए। उन्होंने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि बिहार का सकल नामांकन अनुपात (GER) मात्र 30 प्रतिशत है, जबकि राष्ट्रीय औसत 56 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि 1 लाख की आबादी पर बिहार में केवल 7 कॉलेज हैं, जबकि विकसित राज्यों में यह संख्या 30 तक है।
नेताओं ने पेपर लीक की घटनाओं को लेकर सरकार को घेरा। उन्होंने नीट (NEET) यूजी, बीपीएससी (BPSC), एसएससी (SSC) और शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में हो रहे घोटालों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि यह रैकेट पूरे देश में बिहार को बदनाम कर रहा है। इसके साथ ही उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की कथित नकली डिग्री का मुद्दा भी उठाया गया।
डबल इंजन नहीं, ‘ट्रबल इंजन’ की सरकार
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भाजपा-जदयू की सरकार को “डबल इंजन नहीं, बल्कि ट्रबल इंजन” बताया। उन्होंने कहा कि यह ऐसा इंजन है जिसका पिस्टन खराब हो चुका है और वह सिर्फ धुआँ फेंक रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार जो भगवान बुद्ध और महावीर की ज्ञान भूमि है, वहाँ आज प्रजातंत्र का गला घोंटा जा रहा है। बघेल ने मनरेगा के पतन, कृषि उत्पादों की MSP पर खरीद न होने, और पुराने उद्योगों के बंद होने को आर्थिक विनाश का कारण बताया।
वरिष्ठ नेता अभिरंजन चौधरी ने महिलाओं को ₹10,000 देने की योजना को “रेवड़ी” करार दिया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ चुनाव से पहले किया गया एक दिखावा है, जबकि राज्य की एक करोड़ से अधिक महिलाएं 30-40% के ऊंचे ब्याज दर वाले माइक्रो फाइनेंस के कर्ज के चंगुल में फंसी हुई हैं।
सामाजिक न्याय और आरक्षण पर राजनीतिक हमला
जयराम रमेश ने जातीय सर्वेक्षण और 65% आरक्षण के मुद्दे को उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा हमेशा से जातीय जनगणना की विरोधी रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि 65% आरक्षण को संवैधानिक सुरक्षा देने के लिए इसे संविधान की नौवीं अनुसूची (Ninth Schedule) में शामिल कराने का प्रयास क्यों नहीं किया गया, जबकि तमिलनाडु में 69% आरक्षण इसी अनुसूची के तहत सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि वर्तमान मुख्यमंत्री सिर्फ “नाम के मुख्यमंत्री” हैं, जबकि सरकार रिमोट कंट्रोल से चल रही है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि बिहार अब एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है, और महागठबंधन का रास्ता जनता की भलाई, सामाजिक सद्भावना और सशक्तिकरण का रास्ता है। उन्होंने विश्वास जताया कि बिहार की जनता इस 20 साल के जुमले से मुक्ति चाहती है और परिवर्तन सुनिश्चित है।





