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BIHAR ELECTION 2025 :  चिराग पासवान की सीट डिमांड और एनडीए में साख की जंग — धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात, सीट शेयरिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते है चिराग!

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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के मद्देनज़र राजनीतिक लेआउट अब पूरी तरह गर्म हो गया है। गठबंधन पार्टियों के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर मतभेद और दबाव लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में एलजेपी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान की मांगें और उनका NDA के भीतर दबाव बनाना एक महत्वपूर्ण राजनीतिक व्यू—फोकस बना हुआ है..

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार,चिराग पासवान 25–30 विधानसभा सीटों की मांग पर अड़े हैं।
कुछ खबरों में कहा गया है कि एलजेपी (रामविलास) 45–54 सीटों का लक्ष्य रखती है।
हालांकि, चिराग द्वारा मांग की गई सीटें 22–25 निर्धारित करने पर बातचीत हो रही है।

सूत्रों के अनुसार NDA ने उन्हें 25 सीटें ऑफर की हैं, लेकिन चिराग इस प्रपोजल पर तैयार नहीं हैं क्योंकि उनका दावा 40 सीटों का है।, इन मांगों के पीछे की दलील यह है कि 2024 के लोकसभा चुनावों में उनकी पार्टी ने 5 सीटें जीती थीं, और इस प्रदर्शन को विधानसभा स्तर पर सम्मान मिलने चाहिए।

इसके अलावा, उन्होंने यह शर्त भी रखी है कि जिन पाँच लोकसभा सीटों को उनकी पार्टी जीती थी, प्रत्येक सेंटर (लोकसभा क्षेत्र) से कम से कम दो-दो विधानसभा सीटें उन्हें मिलनी चाहिए।

चिराग पासवान की सीट डिमांड और एनडीए में साख की जंग — धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात, सीट शेयरिंग
चिराग पासवान की सीट डिमांड और एनडीए में साख की जंग — धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात, सीट शेयरिंग

NDA की ओर से कहा गया है कि चिराग की मांगों पर पार्टी स्तर पर विचार किया जा रहा है और जल्द ही उत्तर दिया जाएगा।
रिपोर्ट बताती है कि 22–25 सीटों की सीमा पर सहमति बनने की संभावना है।
हालांकि, अभी तक अंतिम सहमति नहीं बनी है। मीडिया खबरों के अनुसार, सीटों की संख्या पर मंथन जारी है और किस क्षेत्र की सीट किस दल को मिलेगी, इस पर पेंच अभी फंसा हुआ है।

बीजेपी की ओर से कहा गया हैं कि उन्हें 25 सीटें देने की तैयारी है, लेकिन चिराग इससे कम पर तैयार नहीं हैं।

इस तरह, सहमति की दिशा में कुछ अड्डे बन रहे हैं, लेकिन अभी पूरी तरह से समाधान नहीं हुआ है।

धर्मेंद्र प्रधान — चिराग पासवान से बैठक और राजनीतिक महत्व
धर्मेंद्र प्रधान, जो केंद्र सरकार में वरिष्ठ पद पर हैं और बिहार चुनाव में NDA के प्रभारी माने जाते हैं, चिराग पासवान से इस सुलझा न पाए मसले को सुलझाने के लिए सक्रिय रूप से सामने आए हैं।
समाचारों के अनुसार, दिल्ली में चिराग के आवास पर धर्मेंद्र प्रधान, साथ ही विनोद तावड़े और मंगल पांडेय उनसे मुलाकात करने पहुंचे।

यह बैठक लगभग 45–50 मिनट चली।
इस दौरान चिराग की मांगों, सीट बंटवारे की लॉजिस्टिक्स, गठबंधन में संतुलन बनाए रखने की चुनौतियों पर चर्चाएँ हुईं।
BJP की ओर से चिराग को आश्वासन दिया गया कि उनकी मांगों को गंभीरता से ले जाया जाएगा और फाइनल ऑफर जल्द किया जाएगा।

कहा जा रहा है कि यदि अगले कुछ समय में सहमति नहीं बनी, तो गठबंधन में पेंच और बढ़ सकती है।

इस बैठक का राजनीतिक महत्व इसलिए है क्योंकि चिराग पासवान एलजेपी को गठबंधन में दबदबा बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं अगर NDA शीर्ष नेतृत्व उन्हें आग्रहपूर्वक मनाने में कामयाब हो जाता है, तो सीट बंटवारे पर तनाव कम हो सकता है; लेकिन यदि नहीं, तो दरवाजा दूसरी संभावनाओं—जैसे अन्य गठबंधन या रणनीतिक विकल्पों—के लिए खुला माना जा सकता है..

धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात, सीट शेयरिंग
धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात, सीट शेयरिंग

संभावित समझौता फॉर्मूला — सीट बंटवारा (अप्रैल 2025 अनुमान)
BJP / JDU (मुख्य घटक) ~ 205 सीटें (दोनों मिलकर) — BJP और JDU के बीच लगभग समान बंटवारे की योजना है।
LJP (रामविलास) — चिराग पासवान ~ 25 सीटें (समर्थित संसूचना) मांग: 40–45 सीटें, साथ ही ब्राह्मपुर और गोविंदगंज जैसी सीटें विशेष रूप से अभी तक विवादित सीटों पर सहमति नहीं; दो महत्वपूर्ण सीटों पर अटकाव है।
HAM (जितन राम मांझी) ~ 7 सीटें — यदि LJP को अधिक मिली, तो HAM की हिस्सेदारी कम हो सकती है।
RLM / अन्य छोटे घटक ~ 6 सीटें — अन्य छोटे दलों को शेष विभाजन में हिस्सेदारी मिलने की संभावना।

सीट बंटवारे की चुनौतियां और विवादित सीटें
ब्राह्मपुर और गोविंदगंज: चिराग पासवान ने इन दोनों सीटों को अपनी पार्टी के लिए विशेष रूप से मांगा है। लेकिन अभी तक BJP / अन्य घटकों के साथ इन सीटों पर सहमति नहीं बनी है।

LJP चिराग की मांग 40–45 सीटों की रही है, लेकिन BJP अपनी तरफ से ~ 25 सीटों का ऑफर देना चाहता है।

यदि LJP को वांछित संख्या नहीं मिलती है, तो BJP / JDU द्वारा उस कमी को HAM या अन्य छोटे दलों की हिस्सेदारी से वसूलने की संभावना हो सकती है।

2–3 दिन में सीट-शेयरिंग फॉर्मूला अंतिम रूप ले सकता है। LJP की हिस्सेदारी 25 सीट तक देखी जा रही है, लेकिन चिराग को अधिक सीटों की पर ज़ोर है — विशेष रूप से जिन क्षेत्रों में उनका दबदबा है, जैसे ब्राह्मपुर और गोविंदगंज। यदि ये विवादित सीटें सुलझ जाती हैं, तो समझौता जल्दी हो सकता है। यदि नहीं, तो गठबंधन खिंचाव की संभावना बनी रहेगी।

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