चुनाव आयोग ने सोमवार को बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव की तारीखें घोषित कर दी । इस चुनाव में जनता यह तय करेगी कि आगे आने वाले वर्षों में राज्य की सरकार कौन चलायेगी…छठ महापर्व के तुरंत बाद ही चुनाव की घोषणा हुई ..चुनाव आयोग ने बताया कि बिहार विधानसभा चुनाव दो चरणों में होंगे 6 नवंबर और 11 नवंबर, को मतदान होगा।
मतगणना और परिणाम की घोषणा 14 नवंबर को होगी।
विदित हो कि बिहार विधानसभा की कुल सदस्य संख्या है 243 सीटें।
साथ ही, चुनाव आयोग ने संबंधित राज्यों में कुछ उपचुनाव भी उसी दिन कराने की व्यवस्था की है। जिस दिन से चुनाव आयोग चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करती है, तब से आचार संहिता (मॉडल कोड ऑफ़ कन्डक्ट )लागू हो जाता है।
चुनाव प्रक्रिया में कैसे और क्या होता है?
1.चुनाव आयोग निश्चित करता है कि किस दिन कौन-कौन से जिले या विधानसभा क्षेत्रों में मतदान होगा। यह कार्यक्रम पहले सार्वजनिक किया जाता है।
2.आयोग एक औपचारिक अधिसूचना जारी करता है जिसमें नामांकन की तिथि, नामांकन वापसी की तिथि आदि निर्धारित होते हैं।
3.नामांकन इच्छुक प्रत्याशी नामांकन दाखिल करते हैं। नामांकन पत्रों की समीक्षा होती है। यदि कोई त्रुटि हो, तो सुधार का अवसर मिलता है।
4.नामांकन वापसी कुछ दिनों के भीतर प्रत्याशी अपना नाम वापस ले सकते हैं।
5.प्रत्याशी और राजनीतिक पार्टियाँ मतदाताओं को अपनी योजनाएँ, वादे और आलोचनाएँ प्रस्तुत करती हैं। प्रचार अवधि चयन होने के बाद शुरू होती है और मतदान से 48 घंटे पहले बंद होती है।
6.मतदान निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता निर्धारित बूथ पर जाकर वोट देते हैं।
7.मतदान समाप्ति के बाद ईवीएम से वोटों की गणना की जाती है और विजेता घोषित किया जाता है।
8.जितने उम्मीदवारों को अधिकतम वोट मिले, वे विधायक बनते हैं। संवैधानिक रूप से राज्यपाल बुलाकर विधानसभा का पहला सत्र होता है और सरकार की शपथ ली जाती है।

चुनाव से पहले SIR(SPECIAL INTENSIVE REVISION)
चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने बिहार में Special Intensive Revision (SIR) नामक मतदाता सूची की समीक्षा की प्रक्रिया लागू की।
इस प्रक्रिया में 21.53 लाख नए मतदाताओं को जोड़ा गया और लगभग 3.66 लाख नाम हटा दिए गए।
बिहार की अंतिम मतदाता सूची में लगभग 7.42 करोड़ मतदाता शामिल हैं।
हालांकि, विपक्ष ने इस प्रक्रिया पर असंतोष व्यक्त किया है और कहा है कि कई मतदाताओं को सूची से बाहर किया गया है। इसके संबंध में मामला सुप्रीम कोर्ट में भी है।
लंबी कतारों को कम करने के लिए मतदान केंद्र की व्यवस्था:-
बिहार ने यह पहल की है कि सभी मतदान केंद्रों में मतदाता संख्या 1,200 से अधिक न हो। इस तरह से लंबी कतारों को कम करने की कोशिश की गई है।
चुनाव आयोग ने 17 नई पहलों की घोषणा की है ताकि मतदान प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक हो सके।
“मोबाइल डिपॉजिट सुविधा (mobile deposit facility)” को भी लागू किया जाएगा — इसका उद्देश्य मतदाताओं की सुविधा बढ़ाना है।
- आचार संहिता के अंतर्गत पार्टियों और उम्मीदवारों को यह निर्देश दिए जाते हैं कि वे संसाधन का दुरुपयोग न करें, चुनावी रैलियाँ सभ्य रूप से करें, सरकारी संसाधनों का उपयोग न करें, आदि।
- चुनाव प्रचार के दौरान झूठी सूचना, सोशल मीडिया ग्रुप्स आदि प्रचार को प्रभावित कर सकती हैं।
- मतदान के दिन या प्रचार काल में तनाव या हिंसा की घटनाएँ हो सकती हैं, इसलिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी होगी।
- लोगों का मतदान केंद्र तक पहुंचना, जागरूकता, मौसम या अन्य बाधाएँ मतदान को प्रभावित कर सकती हैं।





