aekdamkadak.com

सभी पार्टियों की राय : छठ पूजा के तुरंत बाद हो चुनाव..एक या दो चरणों में हो वोटिंग

बिहार-चुनाव-से-पहले-चुनाव-आयोग

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले 4 और 5 अक्टूबर को होने वाले चुनाव आयोग की बैठक चुनाव आयोग के Chief Election Commissioner (CEC) ज्ञानेश कुमार, अन्य आयुक्तों सहित और 12 मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बीच हुई, बिहार विधानसभा चुनावों की तैयारियों पर। इसमें प्रत्येक दल ने आयोग को सुझाव, मांगें, और चिंताएँ प्रस्तुत कीं।

1. आयोग ने दलों से कहा कि वे चुनाव प्रक्रिया के हर स्तर पर सहभागी बनें, पोलिंग और गिनती एजेंट नियुक्त करें, और मतदाताओं के प्रति सम्मान बनाए रखें।
2. आयोग ने यह भी जानकारी दी कि कई पारदर्शिता सुधार लागू किए गए हैं — जैसे कि प्रत्येक बूथ पर अधिकतम मतदाताओं की संख्या 1,200 तय करना, पोस्टल बॉलट की गिनती प्राथमिक राउंड से पहले करने की व्यवस्था, Form 17C द्वारा मतदान अनुपस्थिति रिपोर्टिंग।

राजनीतिक दलों ने अलग- अलग बयान दिए:-
भाजपा
भाजपा की ओर से मांग थी कि बिहार में चुनाव एक या दो चरणों में हों।
उन्होंने आग्रह किया कि बुर्काधारी महिलाओं के वोटर्स की पहचान EPIC (मतदाता पहचान पत्र) से मिलान हो इस तरह यह सुनिश्चित किया जाए कि केवल वास्तविक मतदाता मतदान करें।

बीजेपी ने कहा कि संवेदनशील क्षेत्र, विशेषकर बूथ कैप्चरिंग की आशंका वाले इलाकों में केंद्रशासित बल (CAPF) अग्रिम रूप से तैनात किए जाएँ और “flag march”-style सुरक्षा अभियानों की व्यवस्था हो।

भाजपा ने यह भी कहा कि मतदान एजेंटों को फॉर्म 17C ले जाना चाहिए और मतगणना की टेबल की संख्या बढ़ाई जाए।

जनता दल यूनाइटेड (JDU)

JDU ने आग्रह किया कि बिहार में चुनाव एक ही चरण में कराए जाएँ, क्योंकि उनका यह कहना है कि कानून-व्यवस्था की स्थिति ठीक है।
उन्होंने आयोग की SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया की सराहना भी की और कहा कि बिहार इस प्रक्रिया को देश के लिए उदाहरण बना सकता है।

राष्ट्रीय जनता दल (RJD)
RJD ने फोकस किया SIR प्रक्रिया में हुई 3.66 लाख नामों की कटौती पर — यह पूछने की मांग की कि उन्हें हटाए जाने का कारण क्या है, क्या उन्हें पुनरीक्षित अवसर मिला, और लिखा आदेश क्यों नहीं दिया गया।
उन्होंने कहा कि जो नाम अवैध नागरिक के रूप में चिह्नित किए गए हैं, उन लोगों की सूची सार्वजनिक हो और ज़िला स्तर पर जानकारी दी जाए।

RJD ने यह भी सुझाव दिया कि गिनती के समय वीडियो रिकॉर्डिंग की जाए, अधिकारियों के पक्षपात पर कड़ी कार्रवाई हो, और अधिकारियों के अचानक स्थानांतरणों पर रोक हो।

उन्होंने कहा कि कुछ परिवारों के मतदाताओं को भटक कर विभिन्न बूथों में रखा गया है , इसे सुधारने की मांग की।

कांग्रेस
कांग्रेस ने कहा कि अंतिम मतदाता सूची में अनेक कमियां हैं — नए नामों का जोड़ना और हटाना स्पष्ट रूप से सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

उन्होंने आयोग से यह मांग की कि जो नाम जोड़े गए या हटाए गए हैं, उनकी सूची सार्वजनिक हो, और यह जानकारी दी जाए कि कितने नाम अवैध निवासियों के रूप में चिन्हित हुए।

कांग्रेस ने आयोग से सॉफ्ट कॉपी मतदाता सूची प्रदान करने की मांग भी की।

वामपंथी दल (CPI-ML)
CPI-ML (Liberation) ने कहा कि SIR के दौरान दलितों, कमजोर वर्गों, अल्पसंख्यकों के लिए अलग बूथ बनाए जाएँ।

उन्होंने यह भी कहा कि मतदान एजेंटों को हर बूथ-स्तर पर Form 17C उपलब्ध कराई जाए।

सामान्य बातें जिसे सभी दलों ने कहाः-

अधिकांश दलों ने यह सुझाव दिया कि चुनाव छठ पर्व के बाद तुरंत कराए जाएँ, ताकि मतदाता सुविधा हो।
कहा गया कि चुनाव जितना संभव हो कम चरणों में हों, ताकि प्रचार और मतदाताओं का बोझ कम हो।
दलों ने आयोग की पारदर्शिता पहलों की सराहना की — जैसे 1,200 अधिकतम मतदाता प्रति बूथ की सीमा, पोस्टल बॉलट गिनती व्यवस्था, Form 17C आदि।
आयोग ने दलों से कहा कि वे मतदाता एजेंटों को नामांकन करें, चुनाव को शांतिपूर्ण बनाएं, मतदाताओं को सुरक्षित वातावरण मिले।

दलों ने चुनाव आयोग को एसआईआर (Special Intensive Revision) प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से करने की सराहना की और सूची में नाम हटाए जाने वाले मतदाताओं की जानकारी देने की मांग की।

खासकर उन 3,66,000 (3.66 लाख) नामों के बारे में दलों ने आयोग से स्पष्टीकरण माँगा कि उन्हें सूची
भाजपा ने मतदान केन्द्रों में स्थितियों को बेहतर करने की मांग की — जैसे कि पुराने मतदान केंद्रों को नए सरकारी भवनों में स्थानांतरित करना, जो अब स्कूल या कॉलेज बन चुके हैं।

मतदाताओं को वोटर स्लिप सही समय पर बांटे जाने की मांग, और मतदान केंद्र पर ढके चेहरे वालों की पहचान (आईडी द्वारा) सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

आयोग ने यह प्रस्ताव रखा कि मतदान समाप्ति के बाद पार्टी एजेंटों को फॉर्म 17C देना अनिवार्य हो — ताकि प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।

आयोग ने सभी जिलाधिकारियों (DM) और पुलिस अधिकारियों (SP / IPS) को निष्पक्षता बनाए रखने और सभी शिकायतों का जल्द ही निपटारा करने के निर्देश दिए।

फेक व गलत सूचना रोकने के लिए सोशल मीडिया पर निगरानी रखने और आवश्यकता पर कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया गया।

चुनाव प्रक्रिया, ईवीएम प्रबंधन, रसद, बुनियादी सुविधाएँ (पानी, बिजली, शौचालय आदि) आदि पर तैयारी की समीक्षा की गई।

बैठक के दौरान यह संकेत मिला कि आयोग बिहार विधानसभा चुनाव की तिथियों की घोषणा शीघ्र कर सकता है।
दलों ने सुझाव दिया कि चुनाव छठ पर्व के तुरंत बाद हो, ताकि बाहर से आने वाले मतदाता समय पर मतदान कर सकें…..

Share it :

Table of Contents

लेटेस्ट न्यूज़