aekdamkadak.com

EC ON SIR : बिहार चुनाव से पहले चुनाव आयोग का दौरा और मंथन, CEC ज्ञानेश कुमार की राजनीतिक दलों से मुलाकात, चुनाव पर मांगे सुझाव

EC ON SIR : बिहार चुनाव से पहले चुनाव आयोग का दौरा और मंथन..., CEC ज्ञानेश कुमार की राजनीतिक दलों से मुलाकात, चुनाव पर मांगे सुझाव

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग द्वारा चलाए गए SIR (Special Intensive Revision) अभियान की अंतिम रिपोर्ट जारी कर दी गई । इस रिपोर्ट में बड़ी संख्या में नए मतदाताओं के जुड़ने और डुप्लिकेट या मृत मतदाताओं के नाम हटाए जाने की जानकारी सामने आई है।

SIR में जीवित मतदाता को मृत घोषित कर सूची से नाम हटा दिया गया..तो कहीं मृत मतदाताओं को जिंदा कर दिया गया..पश्चिम चंपारण के रामनगर विधानसभा की बगही पंचायत के डुमरी गाँव के बूथ संख्या 23 पर 15 जीवित मतदाताओं को उनको मृत घोषित कर उनका नाम हटा दिया गया..

पहली अगस्त को जारी इस सूची में भी उनके नाम शामिल नहीं थे..मतदाताओं ने प्रखंड कार्यालय और बीएलओ से लेकर संबंधित अधिकारियों तक गुहार लगाई , आवेदन भी लगाई, लेकिन नाम अब तक नहीं जुड़ा…ऐसी घटनाएँ बहुत बूथों से देखने को मिली है…

🔹 रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु

  1. कुल मतदाता (अंतिम सूची) 7.42 करोड़
  2. जोड़े गए नए मतदाता 21.53 लाख
  3. हटाए गए नाम 3.66 लाख
  4. मृतक मतदाता 22 लाख
  5. डुप्लिकेट नाम 7 लाख
  6. प्रवासी / अनट्रेसेबल मतदाता 35 लाख
  7. कवरेज दर 99.8% (ECI के अनुसार)

🔹 चुनाव आयोग का पक्ष

चुनाव आयोग ने इस रिपोर्ट को “लोकतांत्रिक सुधार का महत्वपूर्ण कदम” बताया है। आयोग का कहना है कि बिहार में पहली बार इतनी बड़ी कवरेज दर हासिल हुई है और इससे मतदाता सूची अधिक पारदर्शी व विश्वसनीय बनेगी।ECI ने कहा कि हटाए गए नामों में मृत, स्थानांतरित या दो जगह पंजीकृत मतदाता शामिल हैं, जबकि सभी नए पंजीकृत नामों की जाँच स्थानीय BLO (Booth Level Officer) द्वारा की गई है।

चुनाव आयोग

🔹 विपक्ष का आरोप

विपक्षी दलों ने इस रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इसे “EC द्वारा रचा गया SIR ड्रामा” बताया और कहा कि लाखों पात्र मतदाताओं के नाम बिना पर्याप्त सूचना के हटा दिए गए हैं।

राजद और कांग्रेस दोनों ने आरोप लगाया कि आयोग ने आधार कार्ड और राशन कार्ड जैसे दस्तावेज़ों को स्वीकार न कर गरीब व पिछड़े वर्ग के मतदाताओं को सूची से बाहर कर दिया।

विवाद और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई

SIR प्रक्रिया को लेकर Association for Democratic Reforms (ADR) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

ADR का कहना था कि यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन करती है क्योंकि इससे लाखों मतदाताओं का बहिष्कार संभव है।

हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने आयोग को SIR प्रक्रिया जारी रखने की अनुमति दी, साथ ही निर्देश दिया कि किसी भी मतदाता का नाम हटाने से पहले उचित नोटिस और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाए।

🔹चुनौतियाँ जो सामने आईं

1. चुनाव से ठीक पहले प्रक्रिया पूरी करनी पड़ी, जिससे शिकायतों के निवारण में देरी हुई।

2. आधार, EPIC या राशन कार्ड को पर्याप्त पहचान के रूप में स्वीकार न करना कई मतदाताओं के लिए मुश्किल साबित हुआ।

3. हटाए गए नामों की सूची और कारण सार्वजनिक नहीं किए गए।

4. विपक्ष का दावा है कि हटाए गए नाम विशेष क्षेत्रों में अधिक हैं, जिससे राजनीतिक लाभ का संदेह है।

ECI का मानना है कि 99.8% कवरेज के साथ बिहार की मतदाता सूची पहले से कहीं अधिक अपडेट हुई है।

डुप्लिकेट व मृत मतदाताओं के नाम हटने से मतदान प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी।

युवाओं और पहली बार वोट करने वालों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

क्या है SIR अभियान?

SIR यानी Special Intensive Revision — यह चुनाव आयोग का एक विशेष अभियान है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को “शुद्ध और अद्यतन” बनाना है।

इस प्रक्रिया के तहत पूरे बिहार में मतदाताओं की पहचान, सत्यापन और पुनरीक्षण किया गया ताकि मृतक, डुप्लिकेट या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा सकें और पात्र नागरिकों को जोड़ा जा सके।

Share it :

Table of Contents

लेटेस्ट न्यूज़