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Bihar Election 2025 : महिलाओं को सशक्त करने की पहल: ‘संकल्प’ से 25 लाख महिलाओं के खाते में 2500 करोड़ रुपये का अंतरण

महिलाओं को सशक्त करने की पहल

ऐतिहासिक उपलब्धि: मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत 1 करोड़ महिलाओं को मिला 10 हजार करोड़ रुपये का लाभ
पटना: महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में बिहार सरकार ने आज एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। 1 अणे मार्ग स्थित ‘संकल्प’ परिसर से आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में, ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ के तहत राज्य की 25 लाख महिला लाभुकों के खाते में ₹10,000 प्रति लाभुक की दर से ₹2500 करोड़ की राशि का सीधा अंतरण (DBT) किया गया। इस प्रक्रिया में तकनीक का शानदार उपयोग हुआ, जिसके चलते चंद मिनटों में ही यह विशाल राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंच गई। इस महत्वपूर्ण अवसर पर कई वरिष्ठ मंत्री और उच्च अधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने इस योजना की त्वरित और प्रभावी क्रियान्वयन पर संतोष व्यक्त किया।

1 करोड़ लाभुकों का ऐतिहासिक आंकड़ा
आज के इस अंतरण के साथ ही, इस महत्वाकांक्षी योजना ने एक मील का पत्थर पार कर लिया है। ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ के अंतर्गत अब तक कुल 1 करोड़ महिला लाभार्थियों को आर्थिक सहायता प्रदान की जा चुकी है और उनके खातों में कुल ₹10,000 करोड़ की राशि अंतरित की जा चुकी है।

यह आंकड़ा न सिर्फ योजना की व्यापकता को दर्शाता है, बल्कि यह भी सिद्ध करता है कि राज्य सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने के लिए कितनी प्रतिबद्ध है।

महिलाओं को सशक्त करने की पहल

योजना का शुभारंभ 26 सितंबर 2025 को आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के कर कमलों द्वारा किया गया था। तब शुरुआती चरण में 75 लाख महिला लाभुकों को ₹7500 करोड़ की राशि का हस्तांतरण किया गया था। मात्र कुछ ही समय में 25 लाख अतिरिक्त महिलाओं को जोड़कर एक करोड़ का लक्ष्य पूरा करना, सरकारी मशीनरी की दक्षता का प्रमाण है।

आत्मनिर्भरता की कहानी बनी अंजु कुमारी
इस ऐतिहासिक मौके को और खास बनाने के लिए, योजना की एक करोड़वीं लाभार्थी, श्रीमती अंजु कुमारी, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम से जुड़ीं। रोहतास जिले के एक छोटे से गाँव की रहने वाली अंजु कुमारी ने बताया कि वह पिछले कई महीनों से एक छोटा सिलाई केंद्र शुरू करने का सपना देख रही थीं, लेकिन पूंजी की कमी बाधा बन रही थी।

उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “यह ₹10,000 की राशि मेरे लिए केवल पैसा नहीं, बल्कि मेरे सपनों का बीज है। पारंपरिक बैंकों से लोन लेना हमारे लिए मुश्किल था, लेकिन इस योजना ने बिना किसी भाग-दौड़ के हमें यह सहायता दी है। मैं अब अपने सिलाई केंद्र को जल्द ही शुरू कर पाऊँगी।” उनके चेहरे पर आत्मविश्वास और प्रसन्नता स्पष्ट झलक रही थी, जो इस योजना के वास्तविक प्रभाव को दर्शाती है।

आत्मनिर्भरता की कहानी बनी अंजु कुमारी

₹2 लाख तक की अतिरिक्त वित्तीय सहायता का प्रावधान
‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ केवल एक बार की आर्थिक मदद तक सीमित नहीं है। इसका मुख्य लक्ष्य राज्य के सभी परिवारों की एक महिला को उनकी पसंद का रोजगार शुरू करने के लिए प्रारंभिक पूंजी प्रदान करना है। ₹10,000 की शुरुआती सहायता मिलने के बाद, महिला द्वारा सफलतापूर्वक रोजगार शुरू करने पर, ₹2 लाख तक की अतिरिक्त वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाएगी। यह राशि उन्हें अपने कारोबार को बढ़ाने, आधुनिक मशीनरी खरीदने और उत्पादन को बड़े स्तर पर ले जाने में मदद करेगी, जिससे उनका व्यवसाय टिकाऊ और लाभदायक बन सके।

इस योजना के क्रियान्वयन से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि यह पहल न केवल महिलाओं की वित्तीय स्वतंत्रता को बढ़ाएगी, बल्कि उनके सामाजिक आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता को भी मजबूत करेगी। जब महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होती हैं, तो इसका सीधा सकारात्मक प्रभाव उनके बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर पड़ता है, जो अंततः राज्य और देश के आर्थिक विकास को भी बल प्रदान करेगा।

यह योजना स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता के राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप है, जो बिहार को महिला-नेतृत्व वाले विकास के पथ पर अग्रसर कर रही है। सरकार को विश्वास है कि यह ₹10,000 करोड़ की राशि एक निवेश है जो भविष्य में राज्य की अर्थव्यवस्था को कई गुना लाभ पहुंचाएगा।

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