aekdamkadak.com

असली ताकत हथियारों में नहीं, बल्कि सत्य और प्रेम में.., सत्य और अहिंसा के पुजारी, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती…

महात्मा गांधी की जयंती...

हर वर्ष 2 अक्टूबर को भारतवर्ष में गांधी जयंती बड़े आदर और श्रद्धा के साथ मनाई जाती है..इस वर्ष 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के साथ-साथ दशहरा भी है.. अधर्म पर धर्म की जीत वाले त्योहार वाले दिन..जिन्होंने अपनी जिंदगी अन्याय के विरुद्ध लड़ाई करते हुए गुजारा..यह दिन महात्मा गांधी के जन्मदिवस के रूप में पूरी दुनिया में जाना जाता है..वे न केवल भारत के स्वतंत्रता संग्राम के महानायक बनकर उभरे, साथ ही सत्य, अहिंसा और मानवता के सबसे बड़े उपासक भी थे।

गांधी को भारत में “राष्ट्रपिता” (Father of the Nation) के रूप में सम्मानित किया जाता है। उन्होंने स्वतंत्रता की लड़ाई में कभी हिंसा का सहारा नहीं लिया, बल्कि सत्याग्रह, अहिंसा और असहयोग आंदोलन जैसे शांतिपूर्ण उपायों से अंग्रेज़ी हुकूमत को झुकने पर मजबूर कर दिया।

उनका मानना था कि—

[ ] “अहिंसा सबसे बड़ा धर्म है।”

[ ] “सत्य की राह कठिन हो सकती है, लेकिन विजय उसी की होती है।”

गांधी जी का जीवन सादगी और अनुशासन का प्रतीक था। उन्होंने हमें सिखाया कि वास्तविक शक्ति हथियारों में नहीं, बल्कि सत्य और अहिंसा में छिपी होती है। आज भी पूरी दुनिया उनके विचारों को आदर्श मानकर चलती है। यही कारण है कि 2 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्र ने “अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस” (International Day of Non-Violence) के रूप में भी मान्यता दी है।

महात्मा गांधी की जयंती...
महात्मा गांधी की जयंती…

[ ] महात्मा गांधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। उनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर नामक स्थान पर हुआ। वे भारत के स्वतंत्रता संग्राम के महान नेता बने और उन्हें पूरी दुनिया में “महात्मा” और “राष्ट्रपिता” के रूप में सम्मान दिया जाता है।

[ ] गांधी जी ने अंग्रेज़ों के खिलाफ़ लड़ाई में कभी हथियार नहीं उठाए, बल्कि सत्य और अहिंसा के मार्ग से लोगों को आज़ादी दिलाने का रास्ता दिखाया। यही कारण है कि उन्हें “अहिंसा का पुजारी” कहा जाता है।

गांधी जी का बचपन

गांधी जी बचपन से ही बहुत साधारण, शर्मीले और शांत स्वभाव के थे।उन्हें झूठ बोलना बिल्कुल पसंद नहीं था। एक बार स्कूल में शिक्षक ने नकल करने को कहा, लेकिन गांधी जी ने नकल करने से मना कर दिया।

उनके पिता का नाम करमचंद गांधी और माता का नाम पुतलीबाई था। माँ का धार्मिक और सादा जीवन गांधी जी पर गहरा असर छोड़ गया।

बचपन से ही वे सत्य बोलने, व्रत रखने और नियमों का पालन करने में विश्वास करते थे।उन्हें खेलकूद से ज्यादा पढ़ाई और धार्मिक ग्रंथों में रुचि रहती थी।, बाद में पढ़ाई के लिए वे इंग्लैंड गए और वकालत की पढ़ाई पूरी की।

महात्मा गांधी की जयंती...
महात्मा गांधी की जयंती…

पढ़ाई पूरी करने के बाद गांधी जी का जीवन

महात्मा गांधी ने इंग्लैंड से वकालत (Law) की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वे भारत लौट आए और मुंबई में वकालत करने लगे।लेकिन उन्हें यहाँ ज़्यादा सफलता नहीं मिली।

इसी दौरान उन्हें एक केस के लिए (अब्दुल्ला नामक आदमी ) दक्षिण अफ्रीका जाना पड़ा।दक्षिण अफ्रीका में गांधी जी ने देखा कि भारतीयों और अश्वेतों के साथ बहुत भेदभाव होता है।

अपने बारे में बताते हुए उन्होंने इस बात का जिक्र किया कि उन्हें ट्रेन से केवल इसलिए बाहर निकाल दिया गया क्योंकि वे गोरे लोगों के डिब्बे में बैठे थे। यह घटना गांधी जी के जीवन का टर्निंग पॉइंट बनी। वहाँ उन्होंने लोगों को संगठित किया और सत्याग्रह के माध्यम से अन्याय के खिलाफ आंदोलन शुरू किया। यह उनका पहला बड़ा सामाजिक संघर्ष था, जिसने उन्हें आत्मविश्वास दिया।

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में गांधी जी का योगदान…भारत लौटने के बाद गांधी जी पूरी तरह से स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय हो गए। उन्होंने हिंसा का मार्ग छोड़कर केवल सत्य और अहिंसा को अपना हथियार बनाया।

महात्मा गांधी की जयंती...
महात्मा गांधी की जयंती…

उनके प्रमुख आंदोलनों में शामिल हैं:

1. चंपारण आंदोलन (1917) – बिहार के चंपारण में किसानों को नीली खेती के लिए मजबूर किया जा रहा था। गांधी जी ने किसानों के पक्ष में आंदोलन कर उनकी जीत दिलाई।

2. खेड़ा आंदोलन (1918) – गुजरात के किसानों पर करों का भारी बोझ था। गांधी जी ने किसानों के लिए कर माफी की लड़ाई लड़ी।

3. असहयोग आंदोलन (1920-22) – गांधी जी ने देशवासियों से अपील की कि वे अंग्रेज़ी शासन का सहयोग न करें। स्कूल, कॉलेज, अदालतें और सरकारी संस्थानों का बहिष्कार किया गया।

4. दांडी मार्च (नमक सत्याग्रह, 1930) – अंग्रेजों ने नमक पर टैक्स लगाया था। गांधी जी ने साबरमती आश्रम से दांडी तक 390 किमी लंबा पैदल मार्च कर नमक कानून तोड़ा। यह अंग्रेज़ी शासन के खिलाफ़ एक बड़ा प्रतीक बना।

5. भारत छोड़ो आंदोलन (1942) – गांधी जी ने “अंग्रेज़ों भारत छोड़ो” का नारा दिया। इस आंदोलन ने स्वतंत्रता की लड़ाई को अंतिम मुकाम तक पहुँचा दिया।

इस प्रकार भारतीय आजादी के बाद 30 जनवरी 1948 को गांधी जी की हत्या नाथूराम गोडसे नामक एक कट्टरपंथी आदमी ने किया….

गाँधी जी सबसे बड़ा योगदान यह था कि उन्होंने पूरे विश्व को दिखाया कि बिना हिंसा और युद्ध के भी आज़ादी पाई जा सकती है।

Share it :

Table of Contents

लेटेस्ट न्यूज़