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नवरात्रि का छठा दिन: माँ कात्यायनी, जानें माँ को शहद क्यों है इतना प्रिय?, पूजा विधि और महत्व।

नवरात्रि का छठा दिन माँ कात्यायनी

​नवरात्रि, हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार, नौ रातों और दस दिनों तक मनाया जाता है। हर दिन देवी दुर्गा के एक अलग रूप की पूजा होती है। इस पवित्र पर्व का नवरात्रि के छठे दिन माँ दुर्गा के छठे स्वरूप माँ कात्यायनी की पूजा की जाती है। इन्हें शक्ति, साहस और प्रेम की देवी माना जाता है।

कौन हैं माँ कात्यायनी?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, माँ कात्यायनी का जन्म ऋषि कात्यायन के यहाँ उनकी पुत्री के रूप में हुआ था, इसलिए उन्हें कात्यायनी कहा जाता है। उन्होंने महिषासुर नामक राक्षस का वध करके तीनों लोकों को उसके अत्याचारों से बचाया था।

इन्हें विवाह योग्य कन्याओं की देवी भी माना जाता है। कहते हैं कि ब्रज की गोपियों ने भगवान श्रीकृष्ण को पति के रूप में पाने के लिए यमुना तट पर इन्हीं की पूजा की थी।

माँ का स्वरूप

  • माँ कात्यायनी सिंह (शेर) पर सवार होती हैं।
  • उनके चार हाथ हैं:
    • दाहिने तरफ के ऊपर वाला हाथ अभय मुद्रा में होता है (आशीर्वाद देने की मुद्रा)।
    • दाहिने तरफ के नीचे वाला हाथ वर मुद्रा में होता है (वरदान देने की मुद्रा)।
    • बाएँ तरफ के ऊपर वाले हाथ में तलवार होती है।
    • बाएँ तरफ के नीचे वाले हाथ में कमल का फूल होता है।
  • उनका मुखमंडल बहुत तेजस्वी और दिव्य होता है।

पूजा विधि (सरल तरीका)

  1. सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र (हो सके तो पीले रंग के) पहनें।
  2. पूजा की जगह को साफ करें और माँ कात्यायनी की मूर्ति या तस्वीर रखें।
  3. सबसे पहले कलश और गणेश जी की पूजा करें।
  4. माँ को अक्षत (चावल), रोली, कुमकुम, और पीले रंग के फूल अर्पित करें।
  5. धूप और दीपक जलाएं।
  6. भोग में माँ को शहद (Honey) या पीले रंग का हलवा (जैसे कद्दू का हलवा) अर्पित करना बहुत शुभ माना जाता है।
  7. माँ कात्यायनी के मंत्र का जाप करें। एक सरल मंत्र है:
    • “ॐ देवी कात्यायन्यै नमः”
  8. अंत में, आरती करें और सबको प्रसाद बाँटें।

पूजा का महत्व

  • माँ कात्यायनी की पूजा करने से विवाह संबंधी सभी बाधाएँ दूर होती हैं और शीघ्र विवाह का योग बनता है।
  • इससे भक्तों के जीवन में साहस, शक्ति, और आत्मविश्वास का संचार होता है।
  • यह देवी धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति कराती हैं।
  • इनकी कृपा से सभी रोग, शोक, संताप और भय दूर हो जाते हैं।
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