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राजनीतिक दलों के बढ़ते लोक लुभावन वादे और वित्तीय संकटकर्ज ले रहे राज्य

Political parties' increasing populist promises and financial crisis States are taking on debt.

बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, राजनीतिक पार्टियों की तरफ से लोकलुभावन वादे किए जा रहे हैं, लेकिन सत्ता में आए सरकार को वित्तीय मोर्चे पर संकटों का सामना करना पड़ रहा है..

ब्याज अदायगी और वेतन भत्ते काट नहीं सकते..उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा चुनावी वादे पूरे करने में जा रहे हैं..जिसके कारण सरकार बुनियादी जरूरतों जैसे में शिक्षा ,स्वास्थ को उनकी महता के अनुसार तरजीह नहीं दे पा रही है…

कुछ वर्षों पूर्व सुप्रीम कोर्ट ने भी चुनावों के दौरान राजनीतिक दलों के लोकलुभावन मुद्दे के कारण राज्यों पर बढ़ रहे कर्ज को लेकर कोर्ट ने राजनीतिक दलों को सलाह दी थी…


तेलंगाना में चुनावी वादों को लेकर मौजूदा सरकार और विपक्षी दलों के बीच चुनावी वादों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप और चर्चाएं लगातार जारी है..

  • 2023 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने कई गारंटियां दी थीं। इनमें महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा, ₹500 में गैस सिलेंडर, 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली, और किसानों व युवाओं के लिए वित्तीय सहायता जैसी योजनाएं शामिल हैं।
  • सरकार के सत्ता में आने के बाद, इन गारंटियों को लागू करने की प्रगति पर चर्चा होती रही है। कुछ योजनाएं जैसे महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा शुरू की जा चुकी हैं, लेकिन अन्य वादों को पूरा करने में समय लग रहा है।
  • विपक्षी दल, जैसे कि भारत राष्ट्र समिति (BRS) और बीजेपी कांग्रेस सरकार पर चुनावी वादों को पूरा न करने का आरोप लगाते रहे हैं।
  • “एसोसिएशन फॉर सोशियो-इकोनॉमिक एम्पावरमेंट ऑफ द मार्जिनलाइज्ड (ASEEM)” नामक एक गैर-सरकारी संगठन ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि कांग्रेस सरकार ने अल्पसंख्यकों के लिए किए गए कई वादे पूरे नहीं किए हैं।
  • इन वादों को पूरा करने में सरकारी बजट कुछ इस प्रकार से हिलता है कि राज्य सरकार को सड़क की मरम्मत करने के लिए भी बजट जुटाने में दिक्कतें आ रही है..
  • आरबीआई ने भी चेताया है कि अनुत्पादक ख़र्चे आर्थिक परेशानियां खड़े करेंगी……
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