बारिश और डेंगू का सम्बंध बहुत पुराना है और राजधानी पटना भी हॉटस्पॉट बनी रहती है…हर वर्ष की भाँति इस बार भी पटना में डेंगू के मरीजों की संख्या बढ़ती ही जा रही है

बीते दिन की बात करें तो अभी तक डेंगू के 364 मरीज़ मिल चुके हैं और यही रफ्तार रही तो इस बार डेंगू पिछले वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ देगी..डेंगू के आकड़ों के विश्लेषण की माने तो यह बीमारी एक मौसम पैटर्न को फॉलो करती है..
मॉनसून के बाद ही इसके केस में वृद्धि होती है..पिछले आकड़ों से स्पष्ट होता है कि डेंगू जुलाई से नवंबर के बीच अपने चरमोत्कर्ष पर रहता है जो मॉनसून के जलजमाव और मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल समय रहता है…
डेंगू के कारण :-
डेंगू एक वायरल संक्रमण है जो मुख्य रूप से संक्रमित एडीज मच्छर (Aedes mosquito) के काटने से फैलता है। यह सीधे एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता।
यह कैसे फैलता है?
- जब एक मादा एडीज मच्छर किसी ऐसे व्यक्ति को काटता है जो पहले से ही डेंगू वायरस से संक्रमित है, तो वायरस मच्छर के शरीर में चला जाता है।
- वायरस मच्छर के शरीर में कुछ दिनों तक बढ़ता और विकसित होता है।
- जब वही संक्रमित मच्छर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है, तो वह अपने लार के माध्यम से डेंगू वायरस को उस व्यक्ति के खून में पहुंचा देता है।
- इस तरह, वह व्यक्ति संक्रमित हो जाता है और कुछ दिनों के बाद उसमें डेंगू के लक्षण दिखाई देने लगते हैं।
एडीज मच्छर की कुछ महत्वपूर्ण बातें :-
- ये मच्छर आमतौर पर दिन के समय, खासकर सुबह और शाम को अधिक काटते हैं।
- ये मच्छर गंदे पानी की बजाय साफ, रुके हुए पानी में अंडे देते हैं। कूलर, गमले, पुराने टायर, पानी की टंकी और फूलदान जैसी जगहों पर जमा हुआ पानी इनके पनपने का मुख्य स्रोत होता है।
- डेंगू से बचने का सबसे अच्छा तरीका मच्छरों के काटने से बचाव करना और उनके प्रजनन को रोकना है। इसके लिए अपने घर और आसपास पानी जमा न होने दें।
डेंगू के लक्षण :-
- यह फ्लू जैसे लक्षण होते हैं और अक्सर लोग इन्हें सामान्य वायरल बुखार मान लेते हैं। इसमें शामिल हैं:
- अचानक 104°F (40°C) तक का तेज बुखार आना।
- विशेष रूप से आंखों के पीछे तेज दर्द होना।
- इस बीमारी को “हड्डी तोड़ बुखार” (Breakbone Fever) भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें हड्डियों और जोड़ों में बहुत तेज दर्द होता है।
- अत्यधिक थकावट और कमजोरी महसूस होना।
- जी मिचलाना और उल्टी आना।
- शरीर पर लाल-गुलाबी दाने दिखाई देना, जो अक्सर बुखार के कुछ दिन बाद आते हैं।
- शरीर में कुछ ग्रंथियों में सूजन महसूस होना।
डेंगू के उपचार:
- मरीज को पर्याप्त आराम करने और खूब तरल पदार्थ पीने की सलाह दी जाती है ताकि शरीर में पानी की कमी न हो।
- बुखार और दर्द को कम करने के लिए पैरासिटामोल दी जाती है। एस्पिरिन या इबुप्रोफेन जैसी दवाओं से बचना चाहिए क्योंकि ये रक्तस्राव (ब्लड ब्लीडिंग) का खतरा बढ़ा सकती हैं।
- डॉक्टरी सलाह: यदि आपको या आपके परिवार में किसी को भी डेंगू के कोई लक्षण दिखें, खासकर गंभीर लक्षण, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।





