पटना, बुधवार – बिहार में मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) को लेकर सियासत गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि वोटों की चोरी हो रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा, चुनाव आयोग की मदद से चुनावी प्रक्रिया में धांधली कर रही है।
तेजस्वी यादव ने मुजफ्फरपुर की मेयर और भाजपा नेता निर्मला देवी का उदाहरण देते हुए कहा कि उनका नाम वोटर लिस्ट में दो अलग-अलग ईपिक (EPIC) नंबरों के साथ दो बार दर्ज है। उन्होंने बताया कि दोनों एंट्रीज में उनकी उम्र भी अलग-अलग है। इसी तरह, उनके देवर दिलीप कुमार और मनोज कुमार के नाम भी दो-दो बार मतदाता सूची में मौजूद हैं। तेजस्वी ने इस स्थिति को चुनाव आयोग की लापरवाही या मिलीभगत का नतीजा बताया।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह सिर्फ एक जगह का मामला नहीं है। गुजरात भाजपा के प्रभारी भीखूभाई पर भी आरोप लगाते हुए तेजस्वी ने कहा कि उन्होंने गुजरात से अपना नाम कटवाकर पटना में वोटर आईडी बनवा लिया है। उन्होंने इसे राज्यों के बीच मतदाता सूची का दुरुपयोग बताते हुए कहा कि यह सब चुनाव आयोग की जानकारी और सहमति से हो रहा है।
तेजस्वी ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि भाजपा पहले सीबीआई, ईडी और इनकम टैक्स जैसी केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल करती थी, लेकिन अब उसने चुनाव आयोग को भी अपने इशारे पर काम करवाना शुरू कर दिया है। उन्होंने 2020 के विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि आरजेडी महज 12 हजार वोटों के अंतर से 10 सीटें हारी थी, और यह वोट चोरी का नतीजा था।
इन गंभीर आरोपों के बीच, तेजस्वी यादव ने आगामी विधानसभा चुनाव के बहिष्कार का संकेत भी दिया। उन्होंने कहा कि वे 17 अगस्त से राहुल गांधी के साथ ‘वोट अधिकार यात्रा’ पर निकलेंगे और इस दौरान विचार करेंगे कि इस प्रकार की चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा लेना उचित होगा या नहीं।
इस पूरे विवाद पर अभी तक भाजपा की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, इस मामले ने बिहार की राजनीति में गर्माहट बढ़ा दी है और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।





