नई दिल्ली: बिहार में आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी को लेकर एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) समेत INDIA गठबंधन के सभी घटक दलों ने आज चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। नेताओं ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग “लोकतंत्र विरोधी हो चुका है” और बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के बहाने ग़रीब, वंचित, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों के मताधिकार के साथ खिलवाड़ करने का षड्यंत्र रच रहा है।
इस विरोध प्रदर्शन के तहत, RJD और INDIA गठबंधन के माननीय सदस्यों ने संसद भवन से लेकर चुनाव आयोग के मुख्यालय तक मार्च निकाला। इस मार्च के दौरान, उन्होंने भाजपा पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि यह सब भाजपा की “ग़रीब मतदाता विरोधी” चाल का हिस्सा है।
प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग के सामने अपनी बात रखी और इस कथित षड्यंत्र के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। मार्च के दौरान, विरोध कर रहे सभी नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया और उनकी गिरफ्तारी हुई।
RJD नेताओं का कहना है कि बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के तहत बड़ी संख्या में ग़रीब और वंचित वर्ग के मतदाताओं के नाम जानबूझकर काटे जा रहे हैं। उनका मानना है कि यह सब एक सोची-समझी साजिश है जिसका उद्देश्य इन वर्गों के वोट को कम करना है ताकि भाजपा को राजनीतिक लाभ मिल सके।
इस विरोध प्रदर्शन ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं और बिहार की राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। अब देखना यह है कि चुनाव आयोग इस मामले पर क्या प्रतिक्रिया देता है और बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण का भविष्य क्या होता है।





